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मैं हमेशा सिनेमा का समर्थक रहा हूँ... सिनेमा मतलब 'सिर्फ' बॉलीवुड नहीं होता.... यह एक माध्यम है.. लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का... अपना narrative पहुंचाने का, लोगों को किसी विषय पर जागरूक करने का. दुर्भाग्य यह है कि भारत में इसका उपयोग कुछ ख़ास लोगों ने अपने कुत्सित प्रोपेगंडा के लिए किया. हालांकि अब बदलाव दिख रहा है. छावा में आप लाखों कमियाँ ढूंढ लेंगे... लेकिन एक बात है जिसे कोई झुठला नहीं सकता.... इस फ़िल्म ने छत्रपति संभाजी राजे महाराज के जीवन के बारे में लोगों के मन में जागरूकता बढ़ाई है. देश भर से ऐसे video आ रहे हैं...... यही है माध्यम की ताकत.... माध्यम हमेशा अपने कब्जे में रखिये... तभी कुछ सकारात्मक बदलाव आएंगे. माध्यम का boycott करेंगे, या उससे दूर भागेंगे तो उस पर विपक्षी का वर्चस्व हो जायेगा. बात साधारण सी है... समझनी चाहिए 🙏