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चित्तौड़गढ़ दुर्ग ⇒ प्रकार - धान्वन श्रेणी के दुर्ग को छोड़कर सभी श्रेणी का दुर्ग ⇒ निर्माता - चित्रांगद मौर्य (मौर्य राजा) (प्रसिद्ध ग्रंथ 'वीर विनोद' के अनुसार) ⇒ स्थित - मेसा पठार, गंभीरी और बेड़च नदियों के संगम, चित्तौड़गढ़ ⇒ आकार - व्हेल मछली के समान। ⇒ उपनाम - राजस्थान का गौरव, गढ़ों का सिरमौर, चित्रकूट । इस दुर्ग की परिधि लगभग 13 किलोमीटर हैं। ⇒ कहावत - गढ़ तो गढ़ चित्तौड़गढ़, बाकी सब गढ़या। मेवाड़ के गुहिलवंशीय शासक बप्पा रावल ने मौर्य शासक मानमोरी को परास्त कर 734 ई. में इस दुर्ग पर अधिकार कर लिया। ⇒ राजस्थान के दुर्गों में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा, राज्य का सबसे बड़ा लिविंग फोर्ट तथा एकमात्र दुर्ग जिसमें कृषि की जाती है। यह दिल्ली - मालवा मार्ग पर अवस्थित है।