ខ្លឹមសារការប្រកាស
1. महाराणा कुम्भा अपने पिता महाराणा मोकल की मृत्यु के बाद मेवाड़ के शासक बने जिनका कार्य काल 1433 से लेकर 1468 तक रहा है। 2. महाराणा कुम्भा ने अपने जीवन कल में अनेक उपाधियाँ धारण की जिनमे हिन्दूसुरताणा, राणारासो, दानगुरु, हलगुरु, परमगुरु, छापगुरु, शैलगुरु,रायरायन, नरपति, अश्वपति, राजगुरु,महाराजाधिराज इत्यादि है। 3. राणा कुंभा ने मेवाड़ के कुल 84 दुर्गों में से 32 दुर्गों का निर्माण करवाया था जिनमें प्रमुख दुर्ग अचलगढ़ का दुर्ग, कुंभलगढ़ का दुर्ग, भोमट का दुर्ग, बसंतगढ़ का दुर्ग, बदनोर का दुर्ग, मचान दुर्ग इत्यादि दुर्ग शामिल है। 4. राणा कुंभा स्वयं संगीत कला होने के कारण उन्हें "अभिनव भरताचार्य” तथा “वीणावादन प्रवीनेण" भी कहाँ जाता था। 5. राणा कुंभा की रचनाओ में संगीत राज, संगीत मीमांसा, संगीतक्रम दीपिका तथा सूड़प्रबन्ध (सुधा प्रबन्ध ) प्रमुख थी।