ខ្លឹមសារការប្រកាស
भूगोल - सिंधु नदी तंत्र – महत्वपूर्ण तथ्य ✍️- यह विश्व के सबसे बड़े नदी द्रोणियों में से एक है, जिसका क्षेत्रफल 11 लाख 65 हजार वर्ग किलोमीटर है। भारत में इसका क्षेत्रफल 321289 वर्ग किमी है। इसकी कुल लंबाई 2880 किमी है और भारत में इसकी लंबाई 1114 किमी है। भारत में यह एक हिमालय की नदियों में सबसे पश्चिमी है। इसका उद्गम तिब्बती क्षेत्र में कैलाश पर्वत श्रेणी में बोखर चू (Bokhar Chu) के निकट एक हिमनद से होता है। ✍️-तिब्बत में सिंधु नदी तंत्र को सिंगी खंबान (Singi Khamban) अथवा शेर मुख कहते हैं। लद्दाख व जास्कर श्रेणियों के बीच से उत्तर-पश्चिमी दिशा में बहती हुई यह लद्दाख और बालटिस्तान से गुजरती है। ✍️-सिंधु नदी की बहुत सी सहायक नदियाँ हिमालय पर्वत से निकलती हैं – जैसे श्योक, गिलगित, जास्कर, हुंजा, नुबरा, शिगार, गास्टिंग व द्रास। इसके दाहिने तट पर मिलने वाली अन्य मुख्य सहायक नदियाँ खुर्रम, तोची, गोमल, विबोआ और संगर हैं। ये सभी नदियां सुलेमान श्रेणियों से निकली हैं। ✍️-पंचनद नाम पंजाब की पाँच मुख्य नदियों सतलुज, व्यास, रावी, चेनाब और झेलम को दिया गया। अंत में सिंधु नदी कराची के पूर्व में अरब सागर में जा गिरती है। भारत में सिंधु, जम्मू और कश्मीर राज्य में बहती है। ✍️-झेलम, जो सिंधु की महत्वपूर्ण सहायक नदी है, कश्मीर घाटी के दक्षिण-पूर्वी भाग में पीर पंजाल गिरिपद में स्थित वेरीनाग झरने से निकलती है। ✍️-चेनाब, सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यह चंद्रा और भागा दो धाराओं के मिलने से बनती है। ये सरिताएँ हिमाचल प्रदेश में केलाँग के निकट तांडी में आपस में मिलती हैं। इसलिए इसे चंद्रभागा के नाम से भी जाना जाता है। ✍️-रावी, सिंधु की एक अन्य महत्वपूर्ण सहायक नदी है। यह हिमाचल प्रदेश की कुल्लू पहाड़ियों में रोहतांग दर्रे के पश्चिम से निकलती है और राज्य की चंबा घाटी से बहती है। ✍️-व्यास, सिंधु की अन्य महत्वपूर्ण नदी है, जो समुद्र तल से 4000 मीटर की ऊँचाई पर रोहतांग दर्रे के निकट व्यास कुंड से निकलती है। यह नदी कुल्लू घाटी से गुजरती है । यह पंजाब के मैदान में प्रवेश करती है जहाँ हरिके के पास सतलुज नदी में जा मिलती है। ✍️-सतलुज नदी तिब्बत में मानसरोवर के निकट राक्षस ताल से निकलती है, जहाँ इसे लॉगचेन खंबाब के नाम से जाना जाता है। यह हिमालय पर्वत श्रेणी में शिपकीला से बहती हुई पंजाब के मैदान में प्रवेश करती है।